” मूलनाम से आरक्षण दो,सैंथवार-मल्ल का वोट लो “

Kindly Share the Post

 ” मूलनाम  से आरक्षण  दो,सैंथवार-मल्ल  का वोट  लो “

*****************

किसी भी जाति के सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक  विकास  में   शिक्षा स्वास्थ्य, सामाजिक  चेतना की महती भूमिका होती है।सैंथवार-मल्ल  समाज( या जाति) परम्परागत  रूप  से  कृषि  एवं  कृषिगत  कार्यों  में  संलग्न  रहकर अपना जीविकोपार्जन  करता  है । स्वतन्त्रता प्राप्ति के पूर्व  एवं स्वतन्त्रता  प्राप्ति  (15अगस्त1947 )  के  बाद  भी  उसके जीवनशैली  में  बहुत  परिवर्तन  नहीं  आया  है। आज  भी  वह एक  कर्मयोगी  की तरह  खेती- किसानी  ,गाय- भैंस पालन ,बकरी  पालन ,मुर्गी  पालन,  ममत्स्यपालन  जैसे पुराने जीविकोपार्जन  के  कार्यों को कर रहा है। सैंथवार-मल्ल जाति का व्यक्ति अशिक्षा एवं अंधविश्वास  के मकड़जाल  में इस तरह उलझ गया है कि बात-बात  में स्वजातीय  एवं अन्य  जातियों  से लड़ना- झगड़ना,थाना- पुलिस, कोर्ट- कचहरी का चक्कर  लगाना उसकी सामान्य  प्रवृत्ति बन गयी है ।इसी कारण   वह आज के  सामाजिक, राजनीतिक  परिवेश  में हाशिए  पर  चला  गया  है । उसके सीधे- साधे ईमानदार एवं स्वाभिमानी

 व्यवहार , सादा  जीवन   उच्च  विचार  का सभी राजनीतिक 

  दलों  ने  समय- समय  पर  झूठे  ख्वाब  दिखाकर  उसे  खूब लूटा- खसोटा  है । इस  जाति  के  लगभग  05%  परिवार  जिनके  पास  पैतृक  खेती  02  हेक्टेयर  से  अधिक  है,

   ठेकेदारी  एवं अन्य  छोटे- छोटे व्यवसाय  हैं, या  सरकारी  नौकरी है ,उनकी  आर्थिक  स्थिति  थोड़ी  अच्छी  है । शेष लगभग  90%  परिवार  किसी  तरह  अपना  जीवन-  यापन  कर  रहे  हैं  या  गरीबी  रेखा  के  नीचे  जीने  को  मजबूर  हैं । इसीलिए   मंडल  कमीशन  ने  इस  जाति / बिरादरी  को   अन्य   पिछड़ावर्ग   में  रखा  था । वर्ष 1989  में  तत्कालीन  मुख्यमंत्री- उतर प्रदेश,  स्व. नारायण  दत्त  तिवारी  ने  सैंथवार  व  कुर्मी  को  अलग -अलग ( कुर्मी, सैंथवार ) रूप  में  आरक्षण  दिया  था,  लेकिन   स्वार्थी  राजनेताओं ने कुर्मीकरण  को  बढ़ावा  देने  के  लिए  सैंथवार- मल्ल  को कुर्मी  की  उप  जाति  बनाकर ,इस  जाति  के  मान-सम्मान, स्वाभिमान  पर  कलंक  का  टीका  लगा  दिया ।  जबकि सैंथवार- मल्ल   एक  पृथक   स्वतंत्र  जाति है । समय  सबका हिसाब-किताब रखता है,रिजल्ट देता है और सबकभी देता है ।   

  सामाजिक  एवं राजनीतिक  चेतना का थोड़ा-बहुत  असर अब  सैंथवार- मल्ल  बिरादरी   के  स्वाभिमानी  एवं  संकोची स्वभाव  पर  भी  दिखाई  दे  रहा  है । कुर्मीकरण  के  कलंक को  मिटाने  के  लिए  इस  बिरादरी  के  पढ़े- लिखे  नौजवान    *अब  राष्ट्रीय  सैंथवार- मल्ल  स्वाभिमान  मोर्चा  संगठन *

   बनाकर   गांव -गांव, नगर- नगर, मुहल्ला- मुहल्ला  ,मीटिंग, रैली  काश आयोजन  कर  रहे  हैं।  पंजीकृत / रजिस्टर्ड   डाक  से  मुख्यमंत्री- उतर  प्रदेश   एवं  अध्यक्ष  राज्य  पिछड़ावर्ग आयोग  उत्तर  प्रदेश  को पत्र  भी भेज रहे हैं ।  इसके साथ -साथ  वर्तमान  आरक्षण  व्यवस्था  में  संशोधन   कराकर  मूलनाम  ( सैंथवार -मल्ल)  से  जाति  प्रमाण  पत्र  निर्गत  कराने  के  लिए  सभी  राजनैतिक  दलों  को  पत्रक  भी  दिया गया  है । अभी  तक  किसी  भी  राजनैतिक   दल  ने सैंथवार-मल्ल  को उनके मूलनाम  से आरक्षण  दिए  जाने को अपने घोषणापत्र  में( स्थान नहीं दिया है ) / नहीं लिखा है ।

             अतः  बाध्य   होकर   अब  सैंथवार- मल्ल  का स्वजातीय  समाज  यह निर्णय  लिया है कि हमारा वोट/ मतदान  उसी  पार्टी  को  दिया  जाएगा  जो  मूलनाम ( सैंथवार-मल्ल) से आरक्षण  का समर्थन  करेगा ।

                                      निवेदक                                           

             *   राष्ट्रीय सैंथवार-मल्ल स्वाभिमान मोर्चा परिवार*

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top