” मूलनाम से आरक्षण दो,सैंथवार-मल्ल का वोट लो “
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किसी भी जाति के सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक विकास में शिक्षा स्वास्थ्य, सामाजिक चेतना की महती भूमिका होती है।सैंथवार-मल्ल समाज( या जाति) परम्परागत रूप से कृषि एवं कृषिगत कार्यों में संलग्न रहकर अपना जीविकोपार्जन करता है । स्वतन्त्रता प्राप्ति के पूर्व एवं स्वतन्त्रता प्राप्ति (15अगस्त1947 ) के बाद भी उसके जीवनशैली में बहुत परिवर्तन नहीं आया है। आज भी वह एक कर्मयोगी की तरह खेती- किसानी ,गाय- भैंस पालन ,बकरी पालन ,मुर्गी पालन, ममत्स्यपालन जैसे पुराने जीविकोपार्जन के कार्यों को कर रहा है। सैंथवार-मल्ल जाति का व्यक्ति अशिक्षा एवं अंधविश्वास के मकड़जाल में इस तरह उलझ गया है कि बात-बात में स्वजातीय एवं अन्य जातियों से लड़ना- झगड़ना,थाना- पुलिस, कोर्ट- कचहरी का चक्कर लगाना उसकी सामान्य प्रवृत्ति बन गयी है ।इसी कारण वह आज के सामाजिक, राजनीतिक परिवेश में हाशिए पर चला गया है । उसके सीधे- साधे ईमानदार एवं स्वाभिमानी
व्यवहार , सादा जीवन उच्च विचार का सभी राजनीतिक
दलों ने समय- समय पर झूठे ख्वाब दिखाकर उसे खूब लूटा- खसोटा है । इस जाति के लगभग 05% परिवार जिनके पास पैतृक खेती 02 हेक्टेयर से अधिक है,
ठेकेदारी एवं अन्य छोटे- छोटे व्यवसाय हैं, या सरकारी नौकरी है ,उनकी आर्थिक स्थिति थोड़ी अच्छी है । शेष लगभग 90% परिवार किसी तरह अपना जीवन- यापन कर रहे हैं या गरीबी रेखा के नीचे जीने को मजबूर हैं । इसीलिए मंडल कमीशन ने इस जाति / बिरादरी को अन्य पिछड़ावर्ग में रखा था । वर्ष 1989 में तत्कालीन मुख्यमंत्री- उतर प्रदेश, स्व. नारायण दत्त तिवारी ने सैंथवार व कुर्मी को अलग -अलग ( कुर्मी, सैंथवार ) रूप में आरक्षण दिया था, लेकिन स्वार्थी राजनेताओं ने कुर्मीकरण को बढ़ावा देने के लिए सैंथवार- मल्ल को कुर्मी की उप जाति बनाकर ,इस जाति के मान-सम्मान, स्वाभिमान पर कलंक का टीका लगा दिया । जबकि सैंथवार- मल्ल एक पृथक स्वतंत्र जाति है । समय सबका हिसाब-किताब रखता है,रिजल्ट देता है और सबकभी देता है ।
सामाजिक एवं राजनीतिक चेतना का थोड़ा-बहुत असर अब सैंथवार- मल्ल बिरादरी के स्वाभिमानी एवं संकोची स्वभाव पर भी दिखाई दे रहा है । कुर्मीकरण के कलंक को मिटाने के लिए इस बिरादरी के पढ़े- लिखे नौजवान *अब राष्ट्रीय सैंथवार- मल्ल स्वाभिमान मोर्चा संगठन *
बनाकर गांव -गांव, नगर- नगर, मुहल्ला- मुहल्ला ,मीटिंग, रैली काश आयोजन कर रहे हैं। पंजीकृत / रजिस्टर्ड डाक से मुख्यमंत्री- उतर प्रदेश एवं अध्यक्ष राज्य पिछड़ावर्ग आयोग उत्तर प्रदेश को पत्र भी भेज रहे हैं । इसके साथ -साथ वर्तमान आरक्षण व्यवस्था में संशोधन कराकर मूलनाम ( सैंथवार -मल्ल) से जाति प्रमाण पत्र निर्गत कराने के लिए सभी राजनैतिक दलों को पत्रक भी दिया गया है । अभी तक किसी भी राजनैतिक दल ने सैंथवार-मल्ल को उनके मूलनाम से आरक्षण दिए जाने को अपने घोषणापत्र में( स्थान नहीं दिया है ) / नहीं लिखा है ।
अतः बाध्य होकर अब सैंथवार- मल्ल का स्वजातीय समाज यह निर्णय लिया है कि हमारा वोट/ मतदान उसी पार्टी को दिया जाएगा जो मूलनाम ( सैंथवार-मल्ल) से आरक्षण का समर्थन करेगा ।
निवेदक
* राष्ट्रीय सैंथवार-मल्ल स्वाभिमान मोर्चा परिवार*
