हाल ही में ‘ वन नेशन , वन इलेक्शन ‘ की बात चर्चा में रही । इस मुद्दे का हवाला देते हुए मैं मल्ल – सैंथवार समाज के साथ हो रहे दो तरह के व्यवहार की बात करना चाहूँगा।
मल्ल – सैंथवार जाति उत्तर प्रदेश राज्य के पूर्वी भाग में निवास करने वाली जाति है। साथ ही बिहार राज्य में भी इनकी कुछ संख्या रहती है। उत्तर प्रदेश सरकार में इस जाति को कुर्मी जाति का उपजाति बनाकर इसे दर्शाया जाता है। जबकि बिहार सरकार द्वारा की गयी जाति जनगणना में इसे एक स्वतन्त्र जाति के रूप में दर्शाया गया है।
जिस देश में ‘ वन नेशन, वन इलेक्शन ‘ की बात हो रही है उसी देश में एक जाति के साथ दो तरह से व्यवहार करना कहाँ तक न्यायसंगत है ?
