सैंथवार-मल्ल का इतिहास विश्वजीत प्रताप सिंह की कलम से_P#0

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प्राचीन भारतीय गणराज्य

  • (1) कपिलवस्तु के शाक्य
  • ( 2 ) सुमसुमार के भग्ग
  • (3) अलकप्प के बुलि
  • ( 4 ) केसपुत के कालाम
  • ( 5 ) रामग्राम के कोलिय
  • ( 6 ) कुशीनारा के मल्ल
  • ( 7 ) पावा के मल्ल
  • ( 8 ) पीपलीवन के मोरिय
  • ( 9 ) मिथिला के विदेह
  • ( 10 ) वैशाली के लिच्छवी

यहां मै प्राचीन भारत के गणराज्यों के प्रशासन प्रणाली के बारे मे बात करूगा ।


गणराज्यो की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता संवाद व परस्पर वार्तालाप के द्वारा प्रशासन था । यही उनकी सबसे बड़ी कमजोरी भी रही क्योकि आंतरिक मतभेद हमेशा बने रहते थे। गण की कार्यपालिका का अध्यक्ष एक निर्वाचित पदाधिकारी होता था जिसे ‘ राजा ‘ कहते थे। अन्य पदाधिकारियों मे उपराजा, सेनापति, भण्डागारिक प्रमुख थे। परन्तु राज्य की वास्तविक एक केन्द्रीय समिति ‘ संस्थागार ‘ में निहित होती थीं।

लेखक
विश्वजीत प्रताप सिंह
सहायक अध्यापक एवं रिसर्च स्कॉलर
ग्राम : सिकटा
पोस्ट : सिकटा
पडरौना कुशीनगर

 सैंथवार मल्ल

Qualifiacation – M. A. ( History), UGC NET
Assistant Teacher
Composite School Mathiya Mafi Vritti Tola, Dudahi Kushinagar

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