प्राचीन भारतीय गणराज्य
- (1) कपिलवस्तु के शाक्य
- ( 2 ) सुमसुमार के भग्ग
- (3) अलकप्प के बुलि
- ( 4 ) केसपुत के कालाम
- ( 5 ) रामग्राम के कोलिय
- ( 6 ) कुशीनारा के मल्ल
- ( 7 ) पावा के मल्ल
- ( 8 ) पीपलीवन के मोरिय
- ( 9 ) मिथिला के विदेह
- ( 10 ) वैशाली के लिच्छवी
यहां मै प्राचीन भारत के गणराज्यों के प्रशासन प्रणाली के बारे मे बात करूगा ।
गणराज्यो की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता संवाद व परस्पर वार्तालाप के द्वारा प्रशासन था । यही उनकी सबसे बड़ी कमजोरी भी रही क्योकि आंतरिक मतभेद हमेशा बने रहते थे। गण की कार्यपालिका का अध्यक्ष एक निर्वाचित पदाधिकारी होता था जिसे ‘ राजा ‘ कहते थे। अन्य पदाधिकारियों मे उपराजा, सेनापति, भण्डागारिक प्रमुख थे। परन्तु राज्य की वास्तविक एक केन्द्रीय समिति ‘ संस्थागार ‘ में निहित होती थीं।
