गोरखनाथ और सैंथवार समाज के बीच एक महत्वपूर्ण जुड़ाव है, जो आध्यात्मिक और सामाजिक दोनों पहलुओं पर आधारित है।
गोरखनाथ एक प्रसिद्ध योगी और संत थे, जिन्होंने 12वीं शताब्दी में नाथ सम्प्रदाय की स्थापना की।
सैंथवार समाज के लोग गोरखनाथ का बहुत सम्मान करते हैं और उन्हें अपना इष्ट देवता मानते हैं।
गोरखनाथ और सैंथवार समाज के बीच का जुड़ाव:
- गोरखनाथ ने सैंथवार समाज के लोगों को नाथ सम्प्रदाय में दीक्षा दी।
- सैंथवार समाज के लोग गोरखनाथ के अनुयायी बन गए और उनके उपदेशों का पालन करने लगे।
- गोरखनाथ ने सैंथवार समाज के लोगों को सामाजिक और आध्यात्मिक शिक्षा दी।
- सैंथवार समाज के लोग गोरखनाथ के मंदिरों का निर्माण करके उनकी पूजा करते हैं।
महत्वपूर्ण स्थल:
- गोरखपुर (उत्तर प्रदेश): गोरखनाथ का जन्म स्थल और सैंथवार समाज के लोगों का तीर्थ स्थल।
- नाथ सम्प्रदाय का केंद्र (उत्तर प्रदेश): गोरखनाथ ने नाथ सम्प्रदाय की स्थापना की और सैंथवार समाज के लोग उसके अनुयायी बन गए।
- सैंथवार समाज के मंदिर (उत्तर प्रदेश और बिहार): सैन्थवार समाज के लोग गोरखनाथ के मंदिरों का निर्माण करके उनकी पूजा करते हैं।
Author : रामेन्द्र सिंह श्रीनेत
ramendrasinghshrinet@gmail.com

आज महाराज जी सैंथवार मल्ल समाज को कुर्मी में विलीन करने के इच्छुक हैं,। और खुद को अपने आप को क्षत्रिय कहते है, यह समाज पूर्वांचल का सबसे पुराना क्षत्रिय समाज है,
आज महाराज जी सैंथवार मल्ल समाज को कुर्मी में विलीन करने के इच्छुक हैं,। और खुद को अपने आप को क्षत्रिय कहते है, यह समाज पूर्वांचल का सबसे पुराना क्षत्रिय समाज है,
अच्छी जानकारी देने के लिए आप को प्रणाम 🙏 और साधुवाद।
बहुत अच्छा
Tapan
बहुत अच्छा
अच्छी जानकारी है।इसे और लोगों को दी जाय।
अच्छी जानकारी है।
रामेंद्र बाबू अपने बहुत सही लिखा है इसके लिए साधु बाद सैंथवार मल्ल समाज हमेशा से ही गोरखनाथ मंदिर का साथ दिया है लेकिन आज महाराज जी सुनने को तैयार नहीं है।